
विजय कुमार बंसल ब्यूरो चीफ हरिद्वार
हरिद्वार भूपतवाला श्री राधा सर्वेश्वर भगवान के दिव्य विग्रह की प्रतिष्ठा के पावन उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ का भव्य और अलौकिक आयोजन
हरिद्वार भूपतवाला श्री राधा सर्वेश्वर भगवान के दिव्य विग्रह की प्रतिष्ठा के पावन उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ का भव्य और अलौकिक आयोजन भक्तिभाव, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास का अद्वितीय संगम बनकर प्रकट हुआ। 20 फरवरी तक चले इस पावन सप्ताह में परम पूज्य कथा व्यास श्रीमद् जगतगुरु पीठाधीश्वर स्वयंभू राम जी महाराज के सान्निध्य में आचार्य परम पूज्य राधामोहन शरण देव जी महाराज के पावन श्रीमुख से श्रीमद्भागवत कथा का अमृतमय रसपान कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा के प्रत्येक प्रसंग में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का ऐसा सुंदर समन्वय देखने को मिला जिसने उपस्थित भक्तों के अंतर्मन को झंकृत कर दिया और उनके जीवन को धन्य एवं कृतार्थ बना दिया। जब भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, गोपी प्रेम, उद्धव उपदेश और भक्त प्रह्लाद की अटल श्रद्धा का वर्णन हुआ तो ऐसा प्रतीत हुआ मानो स्वयं द्वापर युग की पावन झंकार उस पंडाल में गुंजायमान हो उठी हो। आचार्य श्री ने अत्यंत सुंदर दृष्टांत देते हुए कहा कि मनुष्य का हृदय यदि भूमि के समान है तो श्रीमद्भागवत कथा उस भूमि में बोया गया दिव्य बीज है, जो श्रद्धा और विश्वास के जल से सिंचित होकर भक्ति रूपी वटवृक्ष बन जाता है और अंततः मोक्ष का मधुर फल प्रदान करता है। इस अवसर पर राधा मोहन कुंज, ऋषिकेश रोड, हरिपुर कला, हरिद्वार का लोकार्पण भी अत्यंत हर्षोल्लास और वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य संपन्न हुआ, जिससे क्षेत्र में आध्यात्मिक चेतना का एक नवीन केंद्र स्थापित हुआ। समारोह में हरिद्वार के विभिन्न मठ, मंदिर और आश्रमों से पधारे संत महापुरुषों के पावन सान्निध्य ने कार्यक्रम की गरिमा को और अधिक दिव्यता प्रदान की। संतों के सान्निध्य में आयोजित विशाल संत भंडारा सेवा, समर्पण और भारतीय सनातन परंपरा की अतिथि देवो भव की भावना का जीवंत प्रतीक बन गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर अपने जीवन को धन्य अनुभव किया। इस पावन अवसर पर अपने उद्बोधन में श्री महंत सुदर्शन दास जी महाराज ने कहा कि सतगुरु इस पृथ्वी लोक पर साक्षात ईश्वर के प्रतिनिधि के रूप में अवतरित होते हैं, जो जीवात्मा को अज्ञान रूपी अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं और धर्म एवं कर्म के मार्ग पर चलाकर कल्याण तथा मुक्ति दोनों का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जैसे अंधेरी रात में दीपक मार्गदर्शन करता है, वैसे ही सतगुरु जीवन के कठिन क्षणों में दिशा प्रदान करते हैं और ईश्वर से साक्षात्कार का सेतु बनते हैं। सम्पूर्ण सप्ताह के दौरान वातावरण ‘राधे-राधे’ और ‘हरे कृष्ण’ के मधुर संकीर्तन से गुंजायमान रहा, पुष्पों की सुगंध, शंखनाद और वेद मंत्रों की ध्वनि ने प्रत्येक हृदय को आध्यात्मिक आनंद से परिपूर्ण कर दिया। यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं रहा, बल्कि समाज में भक्ति, संस्कार, सेवा और समर्पण की भावना को जागृत करने वाला एक दिव्य पर्व बन गया, जिसने श्रद्धालुओं के जीवन में नई ऊर्जा, नई दिशा और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास का संचार किया।



